अयोध्या एक सांस्कृतिक विरासत

IMG_20160302_172428अयोध्या अथर्ववेद के वर्णन से लेकर आज तक भारतीय इतिहास, पुरातत्व, धर्म एवं राजनीति में समान रूप सेमहत्त्वपूर्ण रही है। अयोध्या सामान्य भारतवासी के लिए एक बहुत बड़े आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है जिसके मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रतीक हैं। वैष्णव धर्म का प्रमुख केन्द्र होने के बाद भी अयोध्या में इस्लाम के हजरत पैगम्बर शीश की दरगाह एवं बड़ी बुआ की मजार सभी धर्म के लोगों के लिए सामान्य आस्था का केन्द्र है। अयोध्या का इतिहास, पुरातत्व एवं वर्तमान इतना समृद्ध और विस्तृत है कि एक-एक पक्ष पर गम्भीर
शोध कार्य की सम्भावना है।

यह अत्यन्त आश्चर्य की बात है कि जब भारतीय पुरातत्व एवं इतिहास  के समस्त साक्ष्य मौन हैं तब 5वीं शताब्दी ई.पू. इटली के तस्मानिया  क्षेत्रा में रामायण की कथा पर आधारित गुफाओं में सुन्दर चित्रों की शृंखला प्राप्त होती है। यदि 5वीं शताब्दी ई. पू. इटली में रामायण की कथा पर आधारित चित्रा बने तो इन चित्रों को किसने बनाया, कब बनाया और उसके उद्गम स्थल भारत में क्या इसके समकालीन साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं। ये ऐसे प्रश्न हैं जिनके उत्तर में भारतीय संस्कृति की समृद्धि के प्रामाणिक तत्त्व छिपे हैं।

अयोध्या एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है। इसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध यहाँ तक कि ईसाई धर्मों की विरासत विद्यमान है। साक्षी प्रवेशांक को प्रस्तुत करते समय एक सामान्य सांस्कृतिक पर्यटक की जानकारी हेतु फोटो सहित विवरण उपलब्ध
कराये गये हैं जिसमें मन्दिर, कुण्ड, गुरुद्वारे आदि सहित पर्यटन सुविधाओं की जानकारी भी है। यह अयोध्या को जानने के लिए एकमहत्त्वपूर्ण दस्तावेजश् है।

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