कोरी मंदिर

भारत में फैली विभिन्न जातियां भी सन 1900 के बाद अपनी पहचान स्थापित करने के लिए छटपटाने लगी थी। इसी दौरान अयोध्या में भी जातीय मंदिरो के निर्माण का सिलसिला आरंभ हुआ । पददलित कोरी बिरादरी ने भी स्वजातीय एकजुटता के लिए जलवानपुर अयोध्या में सन 1921 में कोरी वंश पंचायती मंदिर का निर्माण शुरु करवाया । कोरी मंदिर के निर्माण में बाबा फागूराम दास का विशेष योगदान रहा ।
बाबा जगरुप दास के बाद यह दायित्व पुजारी लल्लनदास संभाले हुए हैं। मंदिर में श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण व हनुमान (राम दरबार) की मूर्तियां स्थापित हैं। यात्रियों के ठहरने के लिए सात कमरे निर्मित किये गये हैं। पुजारी लल्लन दास बताते हैं कि ज्येष्ठ व बैसाख पूर्णिमा को मंदिर से भण्डारा होता है।

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