छठी आलेखन

सारे अवध में नवजात शिशु के जन्म के छटे दिन बच्चे की बुआ गोबर से लिपी हुई पूर्व दिशा पर ऐपन की थापें रखती है और जच्चा से उसका पूजन करवाती है। वास्तव में ये छ: थापें छ: कृत्तिकाओं का पूजन है। इस समय ननद जी चिराग जलाती हैं उसे नवजात को देखने नहीं दिया जाता है। छठी का थाल तमाम देशी व्यंजनों से भरा जाता है और जच्चा सबके साथ मिलकर उसमें से कुछ खाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *