दन्त धावन कुण्ड

दन्त धावन कुंड हनुमान गढ़ी के निकट स्थित है । पौराणिक धारणा के अनुसार भगवान राम इस स्थान पर अपने भाईयों के साथ दाँत साफ करते थे। एक चर्चित कथा के अनुसार इस स्थान पर कौनडिल्य ब्राह्मण निवास करते थे। कौनडिल्य हिरण की खाल पर बैठते थे । एक दिन खाल कुंड ने गिर गयी। कुंड में गिरने के उपरान्त खाल एक जीवित हिरण में परिवर्तित हो गयी। अपनी मृत्यु से पूर्व ऋषि ने बताया कि वह अपने पूर्व जन्म में एक व्यापारी थे। मृत्यु के उपरान्त ऋषि को तुलसी की पूजा करने का वरदान दिया गया और कुंड के पानी के स्पर्श के बाद ऋषि अपने जन्म के पापो से मुक्त हो गये । इस कुंड की महत्ता राम नवमी के पर्व से जुड़ी है।