बेल्दार मंदिर

मुगल काल में अनेक क्षत्रिय जातियां पददलित हुई लेकिन उन्होंने आतताइयों के प्रभुत्व को स्वीकार करने की अपेक्षा पलायनवादी होना अधिक उचित समझा। इन्हीं में से एक चौहान क्षत्रिय थे जिन्होंने राजपाट छोड़ गावों की राह पकड़ी और मेहनत मशक्कत का मार्ग आजीविका हेतु चुना। कालांतर में इन्हें बेल्दार जाति के रुप में जाना पहचाना गया। बेल्दार पंचायती मंदिर की स्थापना 1973 ई में की ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *