भारतीय भाषाओं में रामकथा

book2अयोध्या शोध संस्थान, अयोध्या, फैजाबाद की ‘साक्षी’ शोध पत्रिका का सद्यः प्रकाशित विशेषांक ‘भारतीय भाषाओं में रामकथा’ पुस्तकाकार रूप में आपके सामने है। एक शोध विशेषांक को पुस्तकाकृति का स्वरूप प्रदान करना स्वयं में सांस्कृतिक महत्त्व तथा भारतीय गौरव बोध की संकल्पना का प्रतीक है।

राम राष्ट्रीय संस्कृति के प्रतीक पुरुष हैं। अन्तर्राष्ट्रीय मानवता के प्रतीक पुरुष राम सुमात्रा, जावा, कम्बोडिया, बर्मा, लंका, नेपाल, बोर्नियो आदि-आदि कितने देशों में स्वीकृत मानवतावादी चेतना के साक्ष्य हैं। देश की समस्त लोकभाषाओं में रामकथा 10वीं सदी से
व्याप्त दिखाई पड़ती है। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती, मराठी, सिंधी, कश्मीरी, पहाड़ी, पंजाबी, असमिया, बंगला, उडि़या, हिन्दी आदि समस्त भाषा रूपों में यह रामकथा कितनी आत्मीयतापूर्वक लोकग्राह्य रही है, इसकी उदाहरण यह कृति है।

भारतीय भाषाओं में रामकथा
सम्पादक: डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह
प्ैठछ रू 978.81.8031.399.8
मूल्य: रू 350.00
पृष्ठ संख्या: 220
साइज: 6.25“ ग 9.5“
प्रकाशक: लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
प्रकाशन वर्ष: 2009

book2authorडॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह

पूर्व प्रोफेसर और अध्यक्ष, हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
पूर्व निदेशकμपत्राचार पाठ्यक्रम संस्थान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय
पूर्व अध्यक्षμहिन्दुस्तानी एकेडमी
आलोचनात्मक साहित्य: हिन्दी वैष्णव भक्ति काव्य में निहित काव्यादर्श और काव्य शास्त्राीय सिद्धान्त; लीला और भक्ति रस; भारतीय
काव्यशास्त्रा; भारतीय काव्यशास्त्रा की रूपरेखा; काव्यांग परिचय; सर्जन और रसास्वादन; भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्रा और हिन्दी
आलोचना; भारतीय और पाश्चात्य काव्यशास्त्रा का तुलनात्मक अनुशीलन; इतिहास दर्शन और साहित्येतिहास की समस्याएँ।
कबीर की कविता, सूर, तुलसीदास, मानस के रचना शिल्प का विश्लेषण, तुलसी के रचना वैविध्य का विवेचन, तुलसी के रचना सामर्थ्य
का विवेचन, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल: निबन्ध संरचना और सैद्धान्तिक चिन्तन।
सर्जनात्मक साहित्य: बनते गाँव टूटते रिश्ते; देवकी का आठवाँ बेटा; अन्धी गली की रोशनी; गोस्वामी तुलसीदास की जीवनगाथा
(उपन्यास) गीति अर्द्धशती; बीती शती के नाम; उर्वशी; गाधि पुत्रा; सागर गाथा तथा अन्य कविताएँ।
सम्पादन तथा टीका भक्तिकाल: गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरित मानस सम्पूर्ण; विनय पत्रिका; कवितावली; बालकाण्ड;
अयोध्याकाण्ड; सुन्दरकाण्ड; लंकाकाण्ड; उत्तरकाण्ड (पृथक-पृथक भूमिका लेखन तथा सम्पादन)
रीतिकाल: करुणाभरण नाटक (लच्छीराम कृत); जोरावर प्रकाश (सूरति मिश्र, रसिकप्रिया की टीका); कृष्णचन्द्रिका (वीर कवि कृत)
संयुक्त लेखन: हिन्दी साहित्य कोश भाग: 1 तथा 2, हिन्दी साहित्य-खण्ड-3, काव्यभाषाμभारतीय पक्ष
काव्यभाषा अलंकार रचना तथा अन्य समस्याएँ; रस-छन्द-अलंकार।

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