भौगोलिक परिचय

भौगोलिक स्थिति, स्थल और परिस्थिति

अयोध्या गौरवपूर्ण अतीत से युक्त एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थान होने के साथ-साथ भगवान राम तथा भगीरथ की पावन जन्म स्थली होने के कारण भारतीय जन-समुदाय तथा भारत के कोने-कोने से आये हुए तीर्थ यात्रियों के आकर्षण का मुख्य केन्द बिन्दु रहा है । अयोध्या का वर्तमान नगर जिसे ‘मंदिरों का नगर’ भी कहते हैं प्राचीन नगर के स्थान उत्तरी पूर्वी कोने तक ही सीमित है, केवल 5 किमी लम्बा एवं 2 किमी चौड़ा है । परन्तु इसका आधा क्षेत्र भी बचा नही है और सम्पूर्ण क्षेत्र जर्जर अवस्था का संकेत है करता है । यहाँ अन्य प्राचीन नगरों के स्थानों की खण्डित मूर्तियाँ एवं कलापूर्ण स्तम्भों के ढके उन्नत टीले नहीं हैं फैजाबाद नगर जो हिन्दू- मुस्लिम संस्कृति का संगम स्थल है 7 किमी लम्बा एवं 3 किमी चौड़ा है, मुख्य रुप से अयोध्या के खण्डरों से निकाली गयी सामग्री से बना हुआ है । दोनो नगर कुल मिलाकर प्राय: 6 वर्ग मील अथवा राम की प्राचीन राजधानी के सम्भावित आकार के लगभग आधे भाग में विस्तृत है|7

अयोध्या नगर सरयू (घाघरा) ___ दाहिने किनारे पर 26048’ उत्तरी आक्षांश एवं 820 31′ पूर्वी देशान्तर में फैज़ाबाद नगर से 8 किमी उत्तर-पूर्व की ओर स्थित है । यह उत्तर रेलवे के लखनऊ-मुग़लसराय बड़ी लाइन पर स्थित है । सरयू नदी पर नवनिर्मित रेलवे पुल बन जाने से अब यह नगर गोण्डा एवं गोरखपुर से रेल मार्ग द्वारा जुड़ गया है । अयोध्या रेलवे स्टेशन नगर से 1/2 किमी दक्षिण की ओर है । लखनऊ से गोरखपुर की ओर जाने वाला राष्ट्रीय उच्च मार्ग नगर के बीच से होकर गुजरता है । नगर से एक पक्की सड़क अयोध्या के बीच से दक्षिण की ओर दशर्ननगर में फैज़ाबाद से जौनपुर-बनारस’ की (ओर जाने वालीं सड़क में मिलती है । नवनिर्मित बाईपास मार्ग नयाघाट (अयोध्या) से सहादतगंज (फैज़ाबाद) तक लगभग 16 किमी की लम्बाई में अयोध्या- फैज़ाबाद नगर के पूर्वी सीमान्त क्षेत्र से वक्राकार रुप में सहादतगंज के समीप फैज़ाबाद-लखनऊ राष्ट्रीय उच्च मार्ग में मिल जाती है ।

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