अयोध्या : सामान्य परिचय


रामायण के अनुसऱर प्राचीन शहर अयोध्या की खोज हिन्दुओं के नीति निर्धारक ‘मनु’ के द्धारा की गयी । सदियों तक यह सूर्य राजवंश कं वंशजों की राजधानी थी, जिसके सबसे प्रसिद्ध राजा ‘भगवान राम’ थे l प्राचीन समय में अयोध्या का नाम  कोशलदेश था । अथर्ववेद के अनुसार यह देवताओं द्धारा निर्मित शहर था और अपने आप में स्वर्ग के समान समृद्ध था ।

अयोध्या इतिहास, पौराणिक कथाओं, साहित्य एवं दर्शन की भूमि है, और इन सबसे बढ़कर धर्म एवं भक्ति की भूमि है । वर्तमान समय में अयोध्या सरयू नदी के दाहिने तट पर उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जनपद में स्थित है ।

अयोध्या फैज़ाबाद शहर के जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर की दूरी पर है और प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 130 किमी की दूरी पर स्थित है । यह 26°-48’  पूर्वी आक्षांश और 62°- 13’ पूर्वी देशान्तर पर स्थित है ।

नामकरण


अयोध्या अवध, साकेत और विनीता भी कहते हैं, अत्यंत प्राचीन नगर है । इसे विभिन्न ऐतिहासिक कार्लो में भिन्न- भिन्न नामों से अभिहित किया जाता रहा है । प्राचीन काल से लेकर महाकाव्य काल तक अयोध्या वृहद्ध कोसल राज्य की राजधानी रही है । अपेक्षाकृत पूर्व में स्थित होने के कारण कोसल का राज्य उन बाह्य आक्रमणकारियों  से बचा रहा जो पश्चमी राज्यों पर प्राय: होते थे । बाह्य आक्रमणकारियों  का कोसल की ओर बढ़ने का साहस नहीं हुआ । सम्भव है कि  इसी से राजधानी का नाम अयोध्या अर्थात अजेय या अवध पड़ा हो । अयोध्या का नाम साततीर्थी में सबसे पहले आया है ।

अयोध्या मथुरा गया काशी कांची अवन्तिका ।

मुरी द्वारावती चैव समतैता मोझहायिका: I l1


यह अयोच्झा या अयुधा नामक दूसरी संज्ञा से भी विख्यात  रहा है । इस नगर का एक अन्य नाम विनीता था ।

विनीता जनाकीर्णा विनीतेतिव सामता I2


यह प्रथम एवं अन्य चार तीर्थकरों का जन्म स्थान था । फाहयान ने इसे शा-ची और टालमी ने  सोगेडा कहा है ।3 ब्राहमण साहित्य में इसका वर्णन एक गावं के रुप में किया गया है।4 भागवत पुराण5 में इसका उल्लेख एक नगर के रुप में हुआ है । स्कन्द पुराण6 के अनुसार अयोध्या मत्तस्याकार है । इसका विस्तार पूर्व-पश्चिम में एक योजन है । इस नगर का नाम साकेत, इक्ष्वाकभूमि, रामपुरी और कोसलपुरी भी था । इस प्रकार अयोध्या विश्व का एक अति प्राचीन नगर है । यही भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का प्रादुर्भाव एवं विकास हुआ तथा जिसका चतुर्दिक प्रसार हुआ । भारतीय इतिहास की प्राय: समी मुख्य ऐतिहासिक घटनाओँ का रंगमंच रहा । यह हिन्दुओं का पवित्रतम नगर है । सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टि से हिन्दू संस्कृति का प्राचीनतम केन्द्र है । जैन, बौद्ध तथा अन्य अनेक मतावलम्बियों के लिए भी एक पवित्र स्थल है ।