छठी आलेखन

सारे अवध में नवजात शिशु के जन्म के छटे दिन बच्चे की बुआ गोबर से लिपी हुई पूर्व दिशा पर ऐपन की थापें रखती है और जच्चा से उसका पूजन करवाती है। वास्तव में ये छ: थापें छ: कृत्तिकाओं का पूजन है। इस समय ननद जी चिराग जलाती हैं उसे नवजात को देखने नहीं दिया […]

ज्योति आलेखन

ज्यूत लिखने में दक्ष स्त्रियां कोहबर की एक पूरी की पूरी दीवार अपनी निपुण उंगलियों से रंग रच कर रख देती है। ज्यूत तो रंग बिरंगा सांस्कृतिक आलेखन है जिसका विस्तार अधिक से अधिक दखने को मिलता है पहले औरतें सीढ़ी लगाकर चहली बांध कर रंग के प्याले ले लेकर ज्यूत रखती थी, अब इस […]

चौक की रस्म

हिन्दू संस्कारों ने “सीमान्तो नयन संस्कार” का विशेष महत्व है जो गर्भस्थ शिशु के सातवें महीने में किया जाता है। आमतौर से लोग इसे चौक की रस्म, गोद भराई या सतवासे की रीति कहते हैं। यह रस्म ससुराल के आंगन में पूरी की जाती है और इसके लिए उपहार लड़की के मायके से आते हैं। […]

प्रमुख उत्सव : त्यौहार

परिक्रमा / देवउत्थान एकादशी /कल्पवास अयोध्या में श्रृंद्धालु भक्त कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से कार्तिक शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक राम माह का कल्पवास करते हैं। कल्पवास अवधि में भक्त अयोध्या में अपने गुरुद्वारे मंदिर या धर्मशाला अथवा किराये के कक्षों में निवास करतै हैं ओर प्रात: व सायं सरयू स्नान, सूर्य पूजन संध्या मंदिरों में […]

स्थानीय परम्पराएं

सम्पूर्ण विश्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के कारण अपना एक विशेष स्थान रखता है। इस सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में धार्मिक नगरी का अपना विशिष्ठ रथान है। पारम्परिक रूप से मनाये जाने वाले उत्सव व पर्व को देखने देश-विदेश से बहुत पर्यटक आते हैं, जिसमें प्रमुख प्रयाग, हरिद्वार व उज्जैन का कुम्भ मेल., […]

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पंचकोसी परिक्रमा कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन अयोध्या के पंचकोस परिवृत्त में पंचकोसी परिक्रमा की जाती है । इस परिक्रमा में भी भक्तगण और स्थानीय निवासी अयोध्या आकर तिथि का इंतजार करते हैं। तिथि के लगने पर सरयू स्नान कर परिक्रमा पथ पर साष्टांग दण्डवत् कर परिक्रमा प्रारम्भ की जाती है। […]

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चौदहकोसी परिक्रमा कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को अयोध्या के चौदहकोस  परिवृत्त से परिक्रमा की जाती है। इस परिक्रमा को करने के लिए भक्त अयोध्या आते हैं और स्थानीय लोग नवमी का इंतजार करते हैं। तिथि के लगने पर सरयू स्नान कर परिक्रमा पथ को शीशे से स्पर्श कर प्रणाम कर भगवान का […]

Parikrama Marg

परिक्रमा मार्ग अयोध्या शायद उत्तर भारत का सबसे प्रचीन स्थान है। जहां हिन्दू तीर्थ यात्रियो के द्वारा परिक्रमाएं की जाती हैं। ये मुख्य पूज्य स्थानो के चक्कर होते हैं जो भिन्न-भिन्न दूरियों में होते हैं जिसमें सबसे छोटी अन्तरगढ़ी परिक्रमा है जो एक दिन मे पूरी हो जाती है। सरयू में डुबकी लगाने के बाद […]

दशरथ कुण्ड

अयोध्या से दर्शन नगर मार्ग पर यह कुण्ड आसिफबाग मुहल्ले में स्थित है। इस कुण्ड का नामकरण भगवान राम के पिता दशरथ के नास से हुआ। मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान करने से मानवमात्र की सभी इच्छायें पूर्ण होती हैं।

विभीषण कुण्ड

विभीषण कुंड, अयोध्या से राजघाट मार्ग पर डाकघर के समीप स्थित है। इस कुंड में स्नान करने के उपरान्त सभी इच्छायें पूर्ण हो जाती हैं।