विद्या कुण्ड

विद्या कुण्ड अयोध्या नगरी में अयोध्या- दर्शननगर सड़क पर स्थित है। श्रुद्धालु इस कुंड में स्नान करने के उपरान्त विद्या देवी के दर्शन प्राप्त करते हैं । हर अष्टमी में इस स्थान पर पूजा करने पर सभी इच्छायें पूर्ण होती हैं।

दन्त धावन कुण्ड

दन्त धावन कुंड हनुमान गढ़ी के निकट स्थित है । पौराणिक धारणा के अनुसार भगवान राम इस स्थान पर अपने भाईयों के साथ दाँत साफ करते थे। एक चर्चित कथा के अनुसार इस स्थान पर कौनडिल्य ब्राह्मण निवास करते थे। कौनडिल्य हिरण की खाल पर बैठते थे । एक दिन खाल कुंड ने गिर गयी। […]

ब्रह्म कुण्ड

ब्रह्म कुंड, अयोध्या नगरी में टेढ़ी बाजार से राजघाट के मार्ग में स्थित है । प्राचीन धारणा के अनुसार इस स्थान पर एक यज्ञ , भगवान ब्रह्मा द्वारा किया गया था । इस कुण्ड के समीप ब्रह्मलोक का मंदिर स्थित है । एक सिख मंदिर भी वहीं पर है । लोगों की धारणा के अनुसार […]

सीता की रसोई

सीता की रसोई जन्मोस्यान (जा रामकोट में स्थित है) की उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। इस मंदिर मैं राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की मूर्तियां उनकी पत्नियों सीता, उर्मिला माडवी, श्रुतिक्रीति के साथ स्थापित है । सीता इस रररोइं में पहली बार अपने परिवारजनों के लिए भोजन पका रही है। बेलन, चकल इस स्थान के मुख्य […]

कोप भवन

कनक भवन हनुमान गढ़ी की दायी दिशा में स्थित है। उसी के समीप कोप भवन स्थित है। यह लोगों की धारणा है कि रानी कैकेयी ने महाराजा दशरथ से कुछ वर्ष पूर्व दो वरदान माँगे थे तथा वचन लिया था कि उचित समय आने पर वरदान देने के वचन को पूर्ण किया जाय। मंदिर में, […]

हनुमान गढ़ी

हनुमान गढ़ी एक किले में स्थित है जिसका द्वार रामकोट पश्चिम दिशा में है । हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त थे । इस मंदिर का निर्माण राजा विक्रमादित्य ने किया था । कुछ वर्ष बाद, नवाब मंसूर अली ने एक किला इस मंदिर के बाहर बनवाया। इस किले का निर्माण टिकैत राय ने […]

तिवारी मंदिर

तिवारी मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तुलसी उद्यान के सामने स्थित है। इस मंदिर की प्रबन्ध व्यवस्था बवुआ जी द्वारा की जा रही हैं ।

क्षीरेश्वर नाथ मंदिर

क्षीरेश्वर नाथ मंदिर राष्ट्रीय राज्य मार्ग के पूर्व में स्थित है । जहाँ पर क्षीर सागर के पश्चिम शिव लिंग स्थापित है। ऐसी मान्यता है कि महाराजा दशरथ ने स्वयं शिव लिंग की स्थापना की थी। शिव लिंग की उपासना करने से सभी इच्छाये पूर्ण होती हैं । यहां पर शिव रात्रि के दिन विशेष […]

सप्तहरि मंदिर

अयोध्या में प्राचीन काल से सप्त हरियों की परम्परा रही है। ऐसा विश्वास जिया जाता है कि भगवान विष्णु ने विभिन्न तपस्वियों की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें जिन स्थानों पर दर्शन दिया वे हरि तीर्थ के नाम से विख्यात हुये। ये सप्त हरि निम्नवत् हैं। 1. चन्द्रहरि: पौराणिक कथाओं के अनुसार अयोध्या के गौरव […]

Jain

अयोध्या में जैन घर्म के दो स्थान हैं । जैन धर्म जिन से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है: शत्रुओँ एवं कर्म शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला। कालान्तर में ‘जिन’ धर्म के अनुयायी जैन कहलाने लगे । जैन धर्म के प्रवर्तकों तथा संस्थापकों को तीर्थकर कहा जाता हे। तीर्थकर का अभिप्राय उन ज्ञान […]