भारतीय भाषाओं में रामकथा

अयोध्या शोध संस्थान, अयोध्या, फैजाबाद की ‘साक्षी’ शोध पत्रिका का सद्यः प्रकाशित विशेषांक ‘भारतीय भाषाओं में रामकथा’ पुस्तकाकार रूप में आपके सामने है। एक शोध विशेषांक को पुस्तकाकृति का स्वरूप प्रदान करना स्वयं में सांस्कृतिक महत्त्व तथा भारतीय गौरव बोध की संकल्पना का प्रतीक है। राम राष्ट्रीय संस्कृति के प्रतीक पुरुष हैं। अन्तर्राष्ट्रीय मानवता के […]

अयोध्या एक सांस्कृतिक विरासत

अयोध्या अथर्ववेद के वर्णन से लेकर आज तक भारतीय इतिहास, पुरातत्व, धर्म एवं राजनीति में समान रूप सेमहत्त्वपूर्ण रही है। अयोध्या सामान्य भारतवासी के लिए एक बहुत बड़े आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है जिसके मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम प्रतीक हैं। वैष्णव धर्म का प्रमुख केन्द्र होने के बाद भी अयोध्या में इस्लाम के हजरत पैगम्बर […]

छठी आलेखन

सारे अवध में नवजात शिशु के जन्म के छटे दिन बच्चे की बुआ गोबर से लिपी हुई पूर्व दिशा पर ऐपन की थापें रखती है और जच्चा से उसका पूजन करवाती है। वास्तव में ये छ: थापें छ: कृत्तिकाओं का पूजन है। इस समय ननद जी चिराग जलाती हैं उसे नवजात को देखने नहीं दिया […]

ज्योति आलेखन

ज्यूत लिखने में दक्ष स्त्रियां कोहबर की एक पूरी की पूरी दीवार अपनी निपुण उंगलियों से रंग रच कर रख देती है। ज्यूत तो रंग बिरंगा सांस्कृतिक आलेखन है जिसका विस्तार अधिक से अधिक दखने को मिलता है पहले औरतें सीढ़ी लगाकर चहली बांध कर रंग के प्याले ले लेकर ज्यूत रखती थी, अब इस […]

चौक की रस्म

हिन्दू संस्कारों ने “सीमान्तो नयन संस्कार” का विशेष महत्व है जो गर्भस्थ शिशु के सातवें महीने में किया जाता है। आमतौर से लोग इसे चौक की रस्म, गोद भराई या सतवासे की रीति कहते हैं। यह रस्म ससुराल के आंगन में पूरी की जाती है और इसके लिए उपहार लड़की के मायके से आते हैं। […]

प्रमुख उत्सव : त्यौहार

परिक्रमा / देवउत्थान एकादशी /कल्पवास अयोध्या में श्रृंद्धालु भक्त कार्तिक कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से कार्तिक शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक राम माह का कल्पवास करते हैं। कल्पवास अवधि में भक्त अयोध्या में अपने गुरुद्वारे मंदिर या धर्मशाला अथवा किराये के कक्षों में निवास करतै हैं ओर प्रात: व सायं सरयू स्नान, सूर्य पूजन संध्या मंदिरों में […]

स्थानीय परम्पराएं

सम्पूर्ण विश्व में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के कारण अपना एक विशेष स्थान रखता है। इस सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में धार्मिक नगरी का अपना विशिष्ठ रथान है। पारम्परिक रूप से मनाये जाने वाले उत्सव व पर्व को देखने देश-विदेश से बहुत पर्यटक आते हैं, जिसमें प्रमुख प्रयाग, हरिद्वार व उज्जैन का कुम्भ मेल., […]