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पंचकोसी परिक्रमा कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन अयोध्या के पंचकोस परिवृत्त में पंचकोसी परिक्रमा की जाती है । इस परिक्रमा में भी भक्तगण और स्थानीय निवासी अयोध्या आकर तिथि का इंतजार करते हैं। तिथि के लगने पर सरयू स्नान कर परिक्रमा पथ पर साष्टांग दण्डवत् कर परिक्रमा प्रारम्भ की जाती है। […]

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चौदहकोसी परिक्रमा कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को अयोध्या के चौदहकोस  परिवृत्त से परिक्रमा की जाती है। इस परिक्रमा को करने के लिए भक्त अयोध्या आते हैं और स्थानीय लोग नवमी का इंतजार करते हैं। तिथि के लगने पर सरयू स्नान कर परिक्रमा पथ को शीशे से स्पर्श कर प्रणाम कर भगवान का […]

Parikrama Marg

परिक्रमा मार्ग अयोध्या शायद उत्तर भारत का सबसे प्रचीन स्थान है। जहां हिन्दू तीर्थ यात्रियो के द्वारा परिक्रमाएं की जाती हैं। ये मुख्य पूज्य स्थानो के चक्कर होते हैं जो भिन्न-भिन्न दूरियों में होते हैं जिसमें सबसे छोटी अन्तरगढ़ी परिक्रमा है जो एक दिन मे पूरी हो जाती है। सरयू में डुबकी लगाने के बाद […]

दशरथ कुण्ड

अयोध्या से दर्शन नगर मार्ग पर यह कुण्ड आसिफबाग मुहल्ले में स्थित है। इस कुण्ड का नामकरण भगवान राम के पिता दशरथ के नास से हुआ। मान्यता है कि इस कुण्ड में स्नान करने से मानवमात्र की सभी इच्छायें पूर्ण होती हैं।

विभीषण कुण्ड

विभीषण कुंड, अयोध्या से राजघाट मार्ग पर डाकघर के समीप स्थित है। इस कुंड में स्नान करने के उपरान्त सभी इच्छायें पूर्ण हो जाती हैं।

विद्या कुण्ड

विद्या कुण्ड अयोध्या नगरी में अयोध्या- दर्शननगर सड़क पर स्थित है। श्रुद्धालु इस कुंड में स्नान करने के उपरान्त विद्या देवी के दर्शन प्राप्त करते हैं । हर अष्टमी में इस स्थान पर पूजा करने पर सभी इच्छायें पूर्ण होती हैं।

दन्त धावन कुण्ड

दन्त धावन कुंड हनुमान गढ़ी के निकट स्थित है । पौराणिक धारणा के अनुसार भगवान राम इस स्थान पर अपने भाईयों के साथ दाँत साफ करते थे। एक चर्चित कथा के अनुसार इस स्थान पर कौनडिल्य ब्राह्मण निवास करते थे। कौनडिल्य हिरण की खाल पर बैठते थे । एक दिन खाल कुंड ने गिर गयी। […]

ब्रह्म कुण्ड

ब्रह्म कुंड, अयोध्या नगरी में टेढ़ी बाजार से राजघाट के मार्ग में स्थित है । प्राचीन धारणा के अनुसार इस स्थान पर एक यज्ञ , भगवान ब्रह्मा द्वारा किया गया था । इस कुण्ड के समीप ब्रह्मलोक का मंदिर स्थित है । एक सिख मंदिर भी वहीं पर है । लोगों की धारणा के अनुसार […]

सीता की रसोई

सीता की रसोई जन्मोस्यान (जा रामकोट में स्थित है) की उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। इस मंदिर मैं राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न की मूर्तियां उनकी पत्नियों सीता, उर्मिला माडवी, श्रुतिक्रीति के साथ स्थापित है । सीता इस रररोइं में पहली बार अपने परिवारजनों के लिए भोजन पका रही है। बेलन, चकल इस स्थान के मुख्य […]

कोप भवन

कनक भवन हनुमान गढ़ी की दायी दिशा में स्थित है। उसी के समीप कोप भवन स्थित है। यह लोगों की धारणा है कि रानी कैकेयी ने महाराजा दशरथ से कुछ वर्ष पूर्व दो वरदान माँगे थे तथा वचन लिया था कि उचित समय आने पर वरदान देने के वचन को पूर्ण किया जाय। मंदिर में, […]