छठी आलेखन

सारे अवध में नवजात शिशु के जन्म के छटे दिन बच्चे की बुआ गोबर से लिपी हुई पूर्व दिशा पर ऐपन की थापें रखती है और जच्चा से उसका पूजन करवाती है। वास्तव में ये छ: थापें छ: कृत्तिकाओं का पूजन है। इस समय ननद जी चिराग जलाती हैं उसे नवजात को देखने नहीं दिया […]

ज्योति आलेखन

ज्यूत लिखने में दक्ष स्त्रियां कोहबर की एक पूरी की पूरी दीवार अपनी निपुण उंगलियों से रंग रच कर रख देती है। ज्यूत तो रंग बिरंगा सांस्कृतिक आलेखन है जिसका विस्तार अधिक से अधिक दखने को मिलता है पहले औरतें सीढ़ी लगाकर चहली बांध कर रंग के प्याले ले लेकर ज्यूत रखती थी, अब इस […]

चौक की रस्म

हिन्दू संस्कारों ने “सीमान्तो नयन संस्कार” का विशेष महत्व है जो गर्भस्थ शिशु के सातवें महीने में किया जाता है। आमतौर से लोग इसे चौक की रस्म, गोद भराई या सतवासे की रीति कहते हैं। यह रस्म ससुराल के आंगन में पूरी की जाती है और इसके लिए उपहार लड़की के मायके से आते हैं। […]