यादव पंचायती मंदिर

धर्मनगरी अयोध्या में यदुवंशीय दो धाराएं एक साथ चलीं। एक तो कृष्णमय थी और दूसरी राममय। इसी कारण यादवों की पंचायतों में अपनी-अपनी धारा के पृथक-पृथक मंदिरों का निर्माण करवाया। अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ले में निर्मित अखिल भारतीय यादव वंश पंचायती मंदिर में श्रीराम दरबार को ही स्थान मिला। इस मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्तियां […]

पासी मंदिर

मध्य भारत के राजा मध्य के दस्यु से पासी जाति का उदय हुआ। पासी भारत के मूल निवासियों में से थी । यह बहादुर और जुझारु प्रवृत्ति के लोगों का कुनबा था। अयोध्या में सूर्यवंश की सत्ता जब खत्म हुई तो राजा आरख्त पासी का राजा हुआ। इन्हें राजपासी के नाम से जाना जाता है। […]

यादव मंदिर

जातीय पंचायती मंदिरों में से एक अयोध्या का यादव मंदिर भी है। अयोध्या के जातीय मंदिरों की परम्परा के विपरीत इस पंचायती मंदिर में श्रीराम जानकी दरबार के स्थान हैं। मंदिर की स्थापना सन 1934 में एक बीघा भूमि क्रय करके बिरादरी के चंदे से की गयी। अयोध्या के अन्य जातीय पंचायती मंदिरों की भांति […]

पाण्डव क्षत्रिय मंदिर

चन्द्रवंशीय पाण्डव क्षत्रियों ने भी धर्मनगरी अयोध्या में अपनी जातीय पहचान बनाये रखने के उद्देश्य से स्वर्गदार मोहल्ले में भव्य पंचायती मंदिर का निर्माण सन 1923 ई० में करवाया । जातीय मंदिर की स्थापना में गोण्डा बहराइच और दिल्ली के चन्द्रवंशीय क्षत्रियों का योगदान रहा है। सन 1995 में एक समिति भी मंदिर व्यवस्था चलाने […]

हलवाई मंदिर

मोदनवाल समाज अपने को ऋषि कश्यप और ऋषि मोदनवाल की स्मृतियों को चिर अमर करने के लिए अयोध्या जब श्रीराम मय हुई और समाज में रामराज की धारा समाहित हुई तो अयोध्या नगरी में अलग-अलग स्थानों पर चार हलवाई मंदिरों की स्थापना की गयी। अवैध कबजों का शिकार हो तीन मंदिर अपनी पहचान खो चुके […]

श्री विश्वकर्मा मंदिर

काष्ठ शिल्पियों ने विश्वकर्मा जी को अपना पूर्वज ही नहीं वरन आराध्य के रुप में भी स्वीकार किया । उन्हीं काष्ठ शिल्पियों ने अयोध्या नगरी के रायगंज मुहल्ले में अपनी जातीय पहचान के लिए श्री विश्वकर्मा मंदिर की स्थापना संवत 1973 में की । मंदिर में विश्वकर्मा भगवान की भव्य मूर्ति के साथ-साथ भगवान श्रीराम. […]

संत रविदास मंदिर

संत कबीर की परम्परा को आगे बढ़ाने में संतरविदास का उल्लेखनीय योगदान रहा । या यूं कहा जाय कि रविदास नव्य मानववाद के आरंभिक संस्थापकों में से एक थे तो अतिशयोक्ति न होगी। संत रविदास अछूतों के उद्धारक के रुप में चिर अमर हुए । उनकी धारा ने दलितों में मानववाद को पल्लवित किया जो […]

बेल्दार मंदिर

मुगल काल में अनेक क्षत्रिय जातियां पददलित हुई लेकिन उन्होंने आतताइयों के प्रभुत्व को स्वीकार करने की अपेक्षा पलायनवादी होना अधिक उचित समझा। इन्हीं में से एक चौहान क्षत्रिय थे जिन्होंने राजपाट छोड़ गावों की राह पकड़ी और मेहनत मशक्कत का मार्ग आजीविका हेतु चुना। कालांतर में इन्हें बेल्दार जाति के रुप में जाना पहचाना […]

कोरी मंदिर

भारत में फैली विभिन्न जातियां भी सन 1900 के बाद अपनी पहचान स्थापित करने के लिए छटपटाने लगी थी। इसी दौरान अयोध्या में भी जातीय मंदिरो के निर्माण का सिलसिला आरंभ हुआ । पददलित कोरी बिरादरी ने भी स्वजातीय एकजुटता के लिए जलवानपुर अयोध्या में सन 1921 में कोरी वंश पंचायती मंदिर का निर्माण शुरु […]

पटनवार मंदिर

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से मिर्जापुर तक बड़े भूभाग में पटनवार जाति के लोगों का बाहुल्य है। पटनवार बंधुओं ने अयोध्या के ऋणमोचन घाट पर भव्य जातीय मंदिर बनवाया जो हैं रामलखन विहार कुण्ड पटनवार वंश पंचायती मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस जातीय मंदिर में विनय श्रृंखला की संस्कृति का भी दर्शन […]