जीवन वृत्त


dr.yogendar pratap singh

नाम : डा0 योगेन्द्र प्रताप सिंह

पदनाम : निदेशक, अयोध्या शोध संस्थान ,संस्कृति विभाग, उ0प्र0 शासन

वर्तमान वेतनमान : रू0 15600-39100, पे बैण्ड-3, ग्रेड पे-7600

पता : 1. आवास- 2/250 विजयखण्ड, गोमती नगर, लखनऊ

  2. कार्यालय-अयोध्या शोध संस्थान, तुलसी स्मारक भवन,अयोध्या-फैजाबाद, उ0प्र0 पिनकोड-224123

जन्मतिथि : 10.06.1960

दूरभाष नम्बर : टेलीफैक्सः 0522-2300718 मो0ः 09415039206

ई-मेल :ayodhyaresearch1986@gmail.com

शैक्षणिक योग्यता : म0ए0 (हिन्दी) पीएच-डी0

कार्य अनुभव


01    16 वर्ष उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन में सहायक प्राध्यापक के पद पर अध्यापन का अनुभव, शोध कार्य का अनुभव।

02    03 वर्ष भारत सरकार संस्कृति मंत्रालय के अन्तर्गत उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद में कार्यक्रम अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी के पद पर प्रशासनिक, वित्तीय एवं कार्यक्रम का अनुभव।

03    02 वर्ष उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अन्तर्गत उपनिदेशक के पद पर कार्य का अनुभव।

04    08 वर्ष उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अन्तर्गत निदेशक, अयोध्या शोध संस्थान के रूप में विभागाध्यक्ष स्तर के कार्य का अनुभव।

अन्य अनुभव


01    राष्ट्रीय/अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक आयोजनों के संचालन का पूर्ण अनुभव। महात्मा बुद्ध के 2500 वर्ष के महापरिनिर्वाण का समारोह भारत सरकार द्वारा किया गया जिसमें प्रदेश में किये गये आयोजन में नोडल अधिकारी के रूप में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विशेष उत्कृष्ट प्रशंसा पत्र।

02    प्रादेशिक स्तर के महत्वपूर्ण आयोजनों जैसे-सैफई महोत्सव, अम्बेडकर जयन्ती समारोह, लखनऊ महोत्सव आदि अनेेक महोत्सवों के संचालन का अनुभव।

03    लोकधारा के रूप में तीन हजार बच्चों द्वारा उत्तर प्रदेश के लोक नृत्यों के प्रदर्शन में प्रशिक्षण का विशेष अनुभव।

04    शिल्प मेलों तथा रोजगारपरक योजनाओं के क्रियान्वयन एवं संचालन का अनुभव।

05    एक छोटी सी संस्था को गतिशीलता प्रदान कर बड़ी संस्था के रूप में विकसित करने का अनुभव। सन् 2002 में अयोध्या शोध संस्थान का कुल बजट मात्र 3.00 लाख तथा जो वर्तमान में उत्तरोत्तर वृद्धि करते हुए रू0 4.00 करोड़ वार्षिक तक पहुॅंच गया है। मा0मुख्यमंत्री जी ने 25 एकड़ भूमि तथा रू0 23.00 करोड़ की अतिरिक्त घोषणा भी की है।

06    अनवरत रामलीला के रूप में निरन्तर 09 वर्षों से प्रतिदिन रामलीला के संचालन कर अनुभव। यह विश्व रिकार्ड के रूप में भी सम्मिलित है।

07    विश्वविद्यालय स्तर के अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘साक्षी’ के प्रकाशन का अनुभव।

08    विगत 05 वर्षों में लगभग 70 उत्कृष्ट शोध प्रकाशन का अनुभव।

09    रोजगारपरक योजनाओं, हस्तशिल्प के विकास में विकास रूचि एवं अनुभव।

10    अन्तर्राष्ट्रीय सम्बंधों को विकसित करने में विशेष योगदान -अयोध्या-कोरिया सम्बंधों की नई गाथा, मारीशस, सूरीनाम, ट्रिनीडाड जैसे देशों से विशेष सम्बंध।

11    भारत सरकार के कई विभागों से आपसी सांमजस्य स्थापित कर संस्थान को गतिशील करने का अनुभव।

12    राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से विशेष सहयोग एवं सामंजस्य।

13    विशेष प्रयास से डा0 राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय, फैजाबाद से संस्थान को शोध केन्द्र के रूप में मान्यता।

14    अवध की पारम्परिक रामलीला की अवध से बाहर त्रिनिडाड, सूरीनाम एवं थाईलैण्ड जैसे देशों में प्रस्तुतियां।

15    अयोध्या का अन्तर्राष्ट्रीय सम्बंध विकसित करने में विश्वविद्यालयों के सहयोग से कई अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार जिस कारण थाईलैण्ड, कोरिया, सूरीनाम, त्रिनिडाड आदि से आत्मीय सम्बंध।

16    विकास आयुक्त, हस्तशिल्प भारत सरकार के सहयोग से ”हस्तशिल्प संग्रहालय” रामकथा पर आधारित

17    स्कूली बच्चों में सांस्कृतिक जागरूकता अभिरूचि हेतु ‘संजीवनी’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के 19 जिलों में लगभग 50 हजार बच्चों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना।

18    ‘काशी की रामलीला’ एल्बम का प्रकाशन तथा समाचार पत्रों की कतरनों पर आधारित ‘रघुनाथ गाथा’ का प्रकाशन-जिसे आई0सी0सी0आर, नई दिल्ली के मा0अध्यक्ष डा0 कर्ण सिंह ने भी सराहा।

19    संस्थान की गतिविधि अयोध्या से निकलकर पूरे प्रदेश एवं देश के कई प्रदेशों में तथा वैश्विक स्तर पर।

20    ‘राम सहित्य कोष’ के रूप में समस्त भारतीय भाषाओं में रामकथा का कोष जिसे ज्ञानपीठ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जायेगा।

21    ‘महाकुम्भ-2013’ हेतु संस्कृति विभाग द्वारा नोडल अधिकारी।