विदेशों में राम-कथा संस्कृति का प्रभाव

इटली आदि यूरोपियन देशों में 5-6 वीं शताब्दी ई०पू० भित्त चित्रों में वाल्मीकि रामायण के प्रसंगों का विस्तृत चित्रण हुआ है यद्यपि भौगोलिक रूप से यूरोप से भारत के अत्यन्त दूर होने के बावजूद रामायण की कथा इटली कैसे पहुंची इसकी जानकारी का हमारे पास अभाव है और यही शोध का विषय भी हो सकता है।

पराधीनता की अवधि में अंग्रेज़ों द्वारा गुलाम बनाकर भारतीय मज़दूरों को जिन देशों में भेजा गया उसका उन मजदूरों द्वारा अपने दुख दर्दों के साथ मात्र रामचरितमानस का साथ रखा जो श्रीराम के वनगमन और आततायी रावण से मुक्ति का संदेश देती थी। यह रामचरितमानस इन देशों के ‘गिरमिटिया मजदूरों’ के लिए संजीवनी का कार्य करती थी।

विदेशों में राम कथा संस्कृति का अत्यधिक प्रभाव पड़ा है जिस पर गहन शोध एवं  सर्वेक्षण की महती आवाश्यकता है।