अयोध्या शायद उत्तर भारत का सबसे प्रचीन स्थान है। जहां हिन्दू तीर्थ यात्रियो के द्वारा परिक्रमाएं की जाती हैं। ये मुख्य पूज्य स्थानो के चक्कर होते हैं जो भिन्न-भिन्न दूरियों में होते हैं जिसमें सबसे छोटी अन्तरगढ़ी परिक्रमा है जो एक दिन मे पूरी हो जाती है। सरयू में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालु अपनी परिक्रमा आरम्भ करते हैं, जो नागेश्वर नाथ मंदिर से शुरू होती है और राम घाट सीताकुण्ड मणि पर्वत और ब्रह्माकुण्ड से होते हुए कनक भवन पर समाप्त होती है। उसके बाद पंचकोसी परिक्रमा होती है जो 5 कोस / 10 मील या 14 कि0मी0 की होती है जो चक्रतीर्थ तुलसी घाट रामघाट, सरयूबाग, हलकारा का पुरवा, दशरथ कुण्ड जियनपुर, रानोपाली, जालपा मंदिर और महताबाग से होकर होती है। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों के देवी देवताओं की लोग पूजा करते हैं। चतुर्दश कोसी परिक्रमा 28मील या 42 कि0मी0 की होती है जो साल में एक बार होती है। यह परिक्रमा अक्षयनवमी पर होती है जो 24 घंटे में पूरी होती है।