Sikh

ब्रम्ह कुण्ड सिक्ख गुरूद्वारा
इस गुरूद्वारे के समीप प्राचीन ब्रम्ह कुण्ड था । कहा जाता है कि ब्रम्हा जी ने इस स्थान पर 5000 वर्षों तक तपस्या किया। ब्रम्ह कुण्ड व उसी सीढ़ी सरयू में विलीन हो चुकी है। ब्रम्ह कुण्ड के कुछ भग्नावशेष हैं । या स्थान अतिरमणीक है इस स्थान से सरयू का विहंगम् दर्शन होता है। आषाढ़ माह में ब्रम्ह कुण्ड पर खड़े होने पर जल ही जल दिखाई देता है।
प्रथम गुरू श्री गुरू नानक देय जी महाराज ने हरिद्वार से जगन्नाथपुरी की यात्रा समय सम्वत् 1557 में इसी स्थान पर बैठकर पण्डितों को सत्य उपदेश दिया था।
नवम् गुरू श्री गुरू तेग बहादुर जी महाराज आसाम से आनन्दपुर साहब (पंजाब) जाते समय विक्रम सम्वत् 1725 में उक्त स्थान में श्री गुरू नानक देव जी मंत्री साहब पर मत्था टेककर सामने बैठकर 48 घन्टे तक अखण्ड तप किया। अपने चरण कमल की निशानी चरण पादुका (खडाऊँ) यहां के ब्राम्हण । सेवक को प्रदान किया जिसका दर्शन गुरूद्वारे में होता हैं ।

गुरूद्वारा नजरबाग
अयोध्या में नजर बाग मोहल्ले में गुरूनानकपुरा फैजाबाद की एक शाखा स्थापित है। इस स्थान पर भी गुरू गोविन्द सिंह जी आये थे और इस स्थान पर एक छोटी बीड़ (गुरू ग्रन्थ साहब हस्तलिपि) प्राप्त हुई थी। यह स्थान राजा मानसिंह ने गुरूद्वारा हेतु भेंट किया है। इस स्थान से प्राप्त बीड़ नानकपुरा गुरूद्वारे के संग्रहालय में संग्रहीत है। इस गुरुद्वारे में निम्नलिखित पर्व मनाये जाते हैं।
1. गुरू नानक जयन्ती
2. गुरू गोविन्द सिंह जयन्ती
3. शहीद पर्व (युद्ध में शहीद हुये गुरूओं को श्रद्धांजलि दी जाती है)
गुरूद्वारे का भव्य भवन निर्माणाधीन है। जिसमें नीचे लंगर हाल, ऊपर प्रार्थनाहाल कुण्ड का निर्माण किया जाना है ।